महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : क्षमापना में परम आनंद की अनुभूति होती है। परम आनंद तभी मिलता है जब वहाँ शक्ति का जागरण होता है, ऐसा प्रतिपादन प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने किया।
प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने कहा कि जब हम अपराध-भावना से क्षमा माँगते हैं तो मन को हल्कापन मिलता है, परंतु परम आनंद प्राप्त नहीं होता। जब हम किसी को क्षमा करते हैं तो उसमें हमें अपना बड़ा होना महसूस होता है और अहंकार संतुष्ट होता है।
किंतु क्षमापना का सूत्र यह बताता है कि क्षमा करने वाले और क्षमा माँगने वाले – दोनों को आनंद की अनुभूति हो, तभी उसे सच्ची क्षमापना कहा जा सकता है। ‘क्षमा’ शब्द ‘क्षम’ धातु से बना है और उसका अर्थ ही शक्ति है।
सम्पूर्ण चराचर की शक्तियों से हमारा सक्षम संबंध बने, यही प्रक्रिया क्षमापना है। क्षमा का अनुभव तीर्थ के रूप में लेने के लिए सबसे पहले क्षमा माँगनी होती है तीर्थंकरों से, जिन्होंने विश्वकल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
इसके बाद आराध्य गुरुदेवों से क्षमा याचना करनी चाहिए। उसके पश्चात् अपने माता-पिता, परिवारजन से क्षमा माँगनी है। फिर जिनसे हम सेवा लेते हैं उनसे और जिन्हें हम अपने से छोटा समझते हैं, उनसे भी क्षमा माँगनी चाहिए।
किसी से गलत कार्य कब होता है? जब उसके ज्ञान या भाव में कमी होती है। इसलिए क्षमापना का सही अर्थ समझना आवश्यक है। जैसे बीमारी वायरस से नहीं होती, बल्कि तब होती है जब हमारी प्रतिकारक शक्ति कमजोर हो जाती है। उसी प्रकार ज्ञान, कर्म और भावनाओं की प्रतिकारक क्षमता को मजबूत करना ज़रूरी है।
गौतम बुद्ध के शिष्य एक बार एक गरीब व्यक्ति को धर्म समझाने गए। लेकिन वह तीन-चार दिन से भूखा था। इसलिए वह उनके उपदेश सुनने की मानसिक स्थिति में नहीं था। जब गौतम बुद्ध स्वयं उससे मिले तो उन्होंने पहले उसे भोजन कराया।
भोजन करने के बाद वह प्रसन्न मन से सब बातें ग्रहण करने के योग्य बना। अर्थात् सामने वाले की दुर्बलता को दूर करने के लिए “मैं अपनी शक्ति मन से अर्पित करने को तैयार हूँ” – यह भाव जागृत होना ही क्षमापना का सच्चा अर्थ है।
किसी को अपराधी ठहराना उचित नहीं है, क्योंकि जब हम किसी को अपराधी मानते हैं तो वह स्वयं एक अपराध है। और एक बार यदि हमने किसी को अपराधी मान लिया, तो फिर हम उसे क्षमा कर ही नहीं सकते। अपराधी ठहराना मतलब उसे कलंकित करना। वास्तव में बुद्धि, भावना और परिस्थिति की दुर्बलता ही हमें गलत कार्य करने के लिए प्रेरित करती है।
